J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







वह जीवन नहीं जो हम जी रहे हैं


संभवत: इस बात का पता लगाने की कोशिश में कुछ समय देना श्रेयस्कर होगा की क्या जीवन की कोई सार्थकता है भी | वह जीवन नहीं जो हम जी रहे हैं, क्योंकि आधुनिक अस्तित्व की सार्थकता तो न के बराबर है |

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Is Loneliness the Same as Aloneness?


We know loneliness, don't we, the fear, the misery, the antagonism, the real fright of a mind that is aware of its own loneliness. We all know that. Don't we? That state of loneliness is not foreign to any one of us. You may have all the riches, all the pleasures, you may have great capacity and bliss, but within, there is always the lurking shadow of loneliness.

अकेलापन और एकाकीपन क्या एक ही चीज़ है?


हम अकेलेपन से परिचित हैं, हैं न? हम उस मन की घबराहट, क्लेश, वैरभाव और अपने अकेलेपन के एहसास से उपजी भयातुरता के असली रूप से परिचित हैं | हमारे लिए यह नयी बात नहीं है? अकेलेपन की यह अवस्था हमारे लिए अनजानी नहीं है| आपके पास विपुल समृद्धि हो, सारी सुख-सुविधाएं हों, अत्यधिक क्षमता और आनंद हों, परंतु फिर भी आपके मन में अकेलेपन का साया सदैव डोलता रहता है |

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Ambition


We have heard people say that without ambition we cannot do anything. In our schools, in our social life, in our relationships with each other, in anything we do in life, we feel that ambition is necessary to achieve a certain end, either personal or collective or social or for the nation.

महत्त्वाकांक्षा


लोगों से हम यह सुनते आए हैं कि यदि महत्त्वाकांक्षा न हो तो हम कुछ नहीं कर सकते | हमारे विद्यालयों में, हमारे सामाजिक जीवन में, हमारे आपसी संबंधों में, जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं उसमें हमें ऐसा महसूस होता है कि किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए महत्त्वाकांक्षा का होना आवश्यक है फिर वह लक्ष्य चाहे व्यक्तिगत हो या सामूहिक हो, सामाजिक हो अथवा राष्ट्र से संबंधित हो |

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What Is the Purpose of Life?


The significance of life is living. Do we really live, is life worth living when there is fear, when our whole life Is trained in imitation, in copying? In following authority is there living? Are you living when you follow somebody, even if he is the greatest saint or the greatest politician or the greatest scholar?

जीवन का प्रयोजन क्या है?


जीवन की सार्थकता जीने में है | जब हम भयग्रस्त रहते हैं, जब हमारा सारा जीवन अनुकरण करने के लिए नक़ल करते रहने के लिए ढाल दिया गया हो तब हम क्या वास्तव में जी रहे होते हैं, तब क्या वह जीवन जीने योग्य रहता है? किसी प्रामाण्य रूप में स्थापित व्यक्ति का अनुगमन करते जाना क्या जीवन जीना है? जब हम किसी के पिछलग्गू बने हुए हों, चाहे वह बड़े से बड़ा संत हो, राजनेता हो या विद्वान हो, तब क्या हम जी रहे होते हैं?

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War: A Spectacular, Bloody Projection Of Ourselves


War is merely an outward expression of our inward state, an enlargement of our daily action. It is more spectacular, more bloody, more destructive, but it is the collective result of our individual activities. Therefore you and I are responsible for war, and what can we do to stop it?

युद्ध : दैनिक जीवन का ही बड़ा व्यापक और खूनी प्रक्षेपण


यह हमारी आतंरिक अवस्था की ही एक बाह्य अभिव्यक्ति है, वह हमारे दैनिक कर्म का ही एक विस्त्तार | यकीनन वह एक अधिक व्यापक, अधिक नृशंस, अधिक विध्वंसक है, परंतु है वह हमारी व्यक्तिगत क्रियाओं का ही सामूहिक परिणाम | अतः आप और मैं ही युद्ध के लिए जिम्मेदार हैं | अब प्रश्न है की हम उसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं?

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