J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)



तो हमें करना क्या होगा?


मेरे विचार में कर्म की समस्या से हमारा गहरा सरोकार आवश्यक है | जब इतनी सारी समस्याएं हमारे सामने हैं--गरीबी, अधिक जनसंख्या, यंत्रों का असाधारण विकास, औद्योगीकरण, आतंरिक तथा बाह्य रूप से गिरावट का एहसास--तो हमें करना क्या होगा?

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We do not belong to that crowd at all.


Most unfortunately there are only two talks and so it is necessary to condense what we have to say about the whole of existence. We are not doing any kind of propaganda; we are not persuading you to think in one particular direction, nor convince you about anything - we must
be quite sure of that. We are not bringing something exotic from the East like the nonsense that goes on in the name of the gurus and those people who write strange things after visiting India - we do not belong to that crowd at all.

हम उस भीड़ में हरगिज़ शामिल नहीं हैं |


बदकिस्मती से हमारे पास केवल दो वार्ताओं का ही समय है; इसलिए सारे अस्तित्व के बारे में हमें जो कुछ कहना है उसे अब संक्षेप में ही कहना होगा | हम किसी प्रकार का प्रचार नहीं कर रहे हैं, किसी विशिष्ट दिशा में सोचने के लिए हम आपको प्रेरित नहीं करना चाहते, न ही किसी बारे में आपसे कुछ मनवाना चाहते हैं -- इस मामले में हमें बिलकुल आश्वस्त रहना चाहिए | हम पूरब से कोई परदेसी लुभावनी चीज़ लेकर नहीं आए हैं -- जैसे कि गुरुओं को लेकर ऊटपटांग बातें की जाती हैं या जैसे कि भारत-यात्रा करने के बाद अजीबोगरीब, अनाप-शनाप बातें लिख दी जाती हैं -- हम उस भीड़ में हरगिज़ शामिल नहीं हैं |

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मन ज्ञात है|


मन ज्ञात है| ज्ञात वह है जिसका अनुभव हम कर चुके हैं | उसी माप से हम अज्ञात को जानने का प्रयास करते हैं| किन्तु यह बात स्पष्ट है की ज्ञात कभी अज्ञात को नहीं जान सकता; यह केवल उसी को जान सकता है जिसका अनुभव इसने किया है, जो इसने सीखा है, संचित किया है | क्या मन अज्ञात को जानने की अपनी असमर्थता के सत्य को देख सकता है?

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old people are fidgety


Question: You say old people are fidgety and bite their nails. Have you not marked younger people also doing these things? Then how is it that the poor old people who have many difficulties are pointedly mentioned as if they are fit for nothing?

बड़े व्याकुल मन के होते हैं


प्रश्न : आप कहते हैं कि बड़े व्याकुल मन के होते हैं और अपने नाखून कुतरते रहते हैं | क्या आप कभी इस पर ध्यान नहीं दिया कि युवा भी यह सब करते हैं? फिर विशेष रूप से बड़ों को लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा जाता है जबकि उन्हें कई तरह कि कठिनाइयों से जूझना होता है, उन्हें बेकार समझा जाता है?

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