J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







हिंसा के माहौल में हमारी ज़िम्मेदारी

कृष्णमूर्ति अध्ययन शिविर : 1 - 4 दिसम्बर 2016 कृष्णमूर्ति स्टडी सेंटर, वाराणसी
‘‘क्या आप हिंसा के चेहरे को साफ और स्पष्ट रूप से देख सकते हैं - हिंसा का चेहरा जो न केवल आपके बाहर बल्कि भीतर भी है ? जिसका अर्थ होगा कि आप पूरी तरह से हिंसा से मुक्त हैं क्योंकि आपने किसी विचारधारा को नहीं थाम रखा है, जिसके जरिये आपको हिंसा से छुटकारा मिलने जा रहा है। इसके लिए बहुत गहरे ध्यान की आवश्यकता है, न कि आपकी शाब्दिक सहमति या असहमति मात्र की।’’ - जे. कृष्णमूर्ति, ज्ञात से मुक्ति


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I have to study a boring book.


Question: I have to study a boring book. I don’t find any interest in it, yet I cannot but study it. How am I to create an interest in it?

मुझे एक उबाऊ पुस्तक पढ़नी पड़ रही है |


प्रश्न : मुझे एक उबाऊ पुस्तक पढ़नी पड़ रही है | हालांकि मुझे उसमें बिलकुल रूचि नहीं है फिर भी मुझे उसे पढ़ना पड़ रहा है | मैं उसमें अपनी रूचि कैसे जगाऊँ?

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मन का कार्य विचार करना है |


प्रश्न: मन का कार्य विचार करना है | मैंने कई वर्ष उन चीज़ों के बारे में सोचते हुए बिताए हैं जिन्हें हम सब जानते हैं – व्यापार, विज्ञान, दर्शन, मनोविज्ञान, कलाएं आदि – तथा अब मैं ईश्वर के बारे में काफी कुछ विचार करता हूं | अनेक रहस्यदर्शियों तथा धार्मिक ग्रंथकारों द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों का अध्ययन करने से मैं कायल हो गया हूं कि ईश्वर है, तथा मैं इस विषय में अपने विचारों का योगदान दे सकता हूं | इसमें गलत क्या है? क्या ईश्वर के बारे में विचार करने से ईश्वर के साक्षात्कार में सहायता नहीं मिलती है?

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Joy


From childhood, we are brought up to condemn some things or some persons, and to praise others. Have you not heard grownup people say, ‘You are a naughty boy’?

आनंद


बचपन से ही आपकी परवरिश इस प्रकार हो जाती है की आप कुछ चीज़ों या लोगों की निंदा करना और कुछ की प्रशंसा करना सीख लेते हैं | क्या बड़ों के मुंह से आपने ऐसा कभी नहीं सुना की ‘तुम बहुत शैतान लड़के हो’?

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