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Network Of Thought



Prejudice has something in common


Prejudice has something in common with ideals, beliefs and faiths. We must be able to think together; but our prejudices, our ideals and so on, limit the capacity and the energy required to think, to observe and examine together so as to discover for ourselves what lies behind
all the confusion, misery, terror, destruction and tremendous violence in the world.

पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है |


पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है | पूर्वाग्रह, आदर्श और ऐसी तमाम बातें, मिलजुल कर सोचने, देखने-परखने की हमारी क्षमता तथा ऊर्जा को प्रतिबंधित कर देती हैं, सीमित कर देती हैं, और इस कारण हम यह पता नहीं कर पाते हैं की इस संसार मैं फैले विभ्रम, पीड़ा, आतंक, विनाश तथा भयानक हिंसा आदि के पीछे असल मुद्दा क्या है |

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Human Consciousness


We were saying that human consciousness is similar in all human beings. Our consciousness, whether we live in the East or West, is made up of any layers of fears, anxieties, pleasures, sorrows and every form of faith. Occasionally, perhaps, in that consciousness there is also love, compassion, and from that compassion a totally different kind of intelligence. And always there is the fear of ending, death.

मानव-चेतना


हम कह रहे थे कि सभी मनुष्य प्राणियों में एक ही मानव-चेतना है | हम पूर्व के निवासी हों या पश्चिम के, हमारी चेतना की अंतर्वस्तु एक ही है : भय, चिंता, सुख, दुख आदि की कई परतें तथा हर प्रकार की आस्था | कभी-कभार शायद उसी चेतना में प्रेम का, करुणा का भी उद्भव हो जाता है | करुणा के साथ एक पूर्णतः भिन्न प्रकार की प्रज्ञा का उदय होता है | और समाप्त होने का, मृत्यु का भय तो हमेशा लगा ही है |

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I would like to repeat


I would like to repeat that we are not trying to convince you of anything - that must be clearly understood. We are not trying to persuade you to accept a particular point of view. We are not trying to impress you about anything; nor are we doing any propaganda. We are not talking about personalities, or who is right and who is wrong, but rather trying to think out, to observe, together, what the world is and
what we are, what we have made of the world and what we have made of ourselves. We are trying together to examine both the inward and the outward man.

मैं फिर से दोहराना चाहूंगा


मैं फिर से दोहराना चाहूंगा कि हम आपसे किसी भी बात को मनवाना नहीं चाहते -- आपको यह पूर्णतः सपष्ट रूप से समझ लेना होगा | किसी विशिष्ट दृष्टिकोण को अपनाने के लिए आपको राज़ी करने की चेष्टा हम नहीं कर रहे हैं | किसी भी बात के बारे में आपको प्रभावित करना भी हम नहीं चाहते | और न ही हम कोई प्रचार कर रहे हैं | हम किन्हीं महापुरुषों की बात भी नहीं कर रहे हैं, और न ही कौन सही कौन गलत इस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं | हम तो सब मिलकर यह पता करना चाह रहे हैं, देखना चाह रहे हैं कि यह संसार क्या है और हम क्या हैं, हमने इस विश्व को क्या बना दिया है और अपने-आपको क्या बना दिया है | हम सब साथ-साथ मनुष्य के भीतरी तथा बाहरी दोनों रूपों की जांच करना चाहते हैं |

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Order


Order is necessary in our everyday activity; order in our action and order in our relationship with each other. One has to understand that the very quality of order is totally different from that of discipline. Order comes through directly learning about ourselves - not according to some philosopher or some psychologist. We discover order for ourselves when we are free from all sense of compulsion, from all sense of determined effort to obtain order along a particular path. That order comes very naturally. In that order there is righteousness.

व्यवस्था


हमारे प्रतिदिन के क्रियाकलाप में व्यवस्था का होना अत्यावश्यक है | साथ ही साथ हमारे एक दुसरे के प्रति संबंध में भी व्यवस्था होनी चाहिए | यह समझना ज़रुरी है कि व्यवस्था का गुणधर्म ही अनुशासन के निहितार्थ से एकदम अलग होता है | व्यवस्था आती है अपने बारे में प्रत्यक्ष रूप से सीखने के परिणामस्वरूप-- किसी दार्शनिक या किसी मनोवैज्ञानिक के अनुसार सीखने से नहीं | दबाव के किसी भी भाव से जब हम मुक्त होते हैं, किसी विशिष्ट मार्ग से व्यवस्था उपलब्ध करने के दृढ़ प्रयास के भाव से मुक्त होते हैं, तब हमें अपने आप व्यवस्था का पता चल जाता है | वह व्यवस्था स्वतः ही, सहज ही आ जाती है | उसी व्यवस्था में सही होना संभव होता है |

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The Brain


We have to consider together whether the brain, which is now only operating partially, has the capacity to function wholly, completely. Now we are only,using a part of it, which one can observe for oneself. One can see that specialization, which may be necessary, brings about the functioning of only a part of the brain. If one is a scientist, specializing in that subject, naturally only one part of the brain is functioning; if one is a mathematician it is the same. In the modern world one has to specialize, and we are asking whether, even so, it is possible to allow the brain to operate wholly, completely.

मस्तिष्क


हमें साथ-साथ विचार-विमर्श करना है कि इस समय आंशिक रूप से कार्य कर पा रहे मस्तिष्क में क्या समग्र रूप से, संपूर्ण रूप से कार्य करने की क्षमता है | इस समय हम उसके केवल एक अंश का ही उपयोग कर रहे हैं, यह हम स्वयं देख सकते हैं | विशेषज्ञता भले ही आवश्यक हो, पर उससे मस्तिष्क आंशिक रूप से कार्य करने लगता है यह बात कोई भी देख सकता है | यदि कोई वैज्ञानिक है और उसने किसी विषय का विशेषज्ञता प्राप्त की है तो स्वभावतः उसके मस्तिष्क का एक अंश ही कार्यरत रहता है | यदि कोई गणितज्ञ है तो उसके बारे में भी ठीक ऐसा ही होगा | आधुनिक विश्व में इस प्रकार की विशेषज्ञता आवश्यक हो गयी है, और हम पूछ रहे हैं की क्या ऐसी स्थिति में भी मस्तिष्क को समग्र रूप से, पूर्ण रूप से कार्य करने देना संभव है |

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