J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)






Truth; God; Death


Death awaits each one of us, whether we like it or not. You may be a high government official with titles, wealth, position, and a red carpet, but there is this inevitable thing at the end of it. So what do we mean by death?

सत्य, ईश्वर, मृत्यु


हम चाहें या न चाहें, मृत्यु सदैव हमारी प्रतीक्षा में रहती है | आप भले ही अनेक उपाधियों से अलंकृत कोई उच्च सरकारी अधिकारी हों या धन-संपदा, प्रतिष्टा, मान-सम्मान से विभूषित कोई व्यक्ति हों, परंतु सब के अंतिम छोर पर यह अपरिहार्य मृत्यु उपस्थित रहती है | तो, मृत्यु से हमारा अभिप्राय क्या है?

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यह महत्त्वपूर्ण है


देखिए, जैसा कि मैंने उस दिन कहा था, वक्ता महत्वपूर्ण नहीं है, पर वह क्या कहता है, यह महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वह जो कुछ कह रहा है, वह आपके ही आत्म-वार्तालाप का उच्चस्वर है | वक्ता जिन शब्दों का प्रयोग कर रहा है, उनके द्वारा आप अपने आप को ही सुन रहे हैं, न कि वक्ता को, और इसीलिए सुनना अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है |

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मैं ईश्वर का अनुभव कैसे कर सकता हूँ?


प्रश्न: मैं ईश्वर का अनुभव कैसे कर सकता हूँ? इस अनुभव के बिना जीवन का क्या उद्देश्य है?
कृष्णमूर्ति: क्या मैं जीवन को सीधे-सीधे समझ सकता हूँ, अथवा मुझे अपने जीवन को अर्थ प्रदान करने के लिए किसी तत्व का अनुभव करना होगा? क्या आप समझ रहे हैं? क्या सौंदर्य की कदरदानी के लिए मुझे उसका उद्देश्य समझना होगा? क्या प्रेम का एक कारण होना चाहिए?

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आज संसार में ईश्वर की बहुत सी अवधारणाएं हैं |


प्रश्न: आज संसार में ईश्वर की बहुत सी अवधारणाएं हैं | आपका ईश्वर के संबंध में क्या विचार है?
कृष्णमूर्ति: सबसे पहले हमें यह पता लगाना चाहिए की अवधारणा से हमारा मतलब क्या है | सोचने की प्रक्रिया से हमारा क्या अभिप्राय है? क्योंकि अंततः हम जब किसी अवधारणा को प्रतिपादित करते है, जैसे ईश्वर को ही लें, तो हमारा यह प्रतिपादन, यह अवधारणा हमारे संस्कारों का ही परिणाम होती है |

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