J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







Krishnamurti Retreat Centre , Uttarkashi


Krishnamurti Retreat Centre (KRC) is located on the banks of the river Bhagirathi in Uttarkashi, which is on the ancient pilgrim route from Rishikesh to Gomukh, the origin of the river Ganga. Sitting atop the high bank of the river, on about 1.4 acres of land, the retreat has as its backdrop the steep mountain slopes covered with pine forests. Set in the quiet rural environs of Ranari village, the retreat is surrounded by mountains and green fields on all sides.

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Question: How do these illuminating talks fulfil and help your purpose?


Question: How do these illuminating talks fulfil and help your purpose? The world has been listening for a long time to the gospel of revolt, the cult of attaining to supreme truth or destroying the self and thereby achieving the highest and the sublimest. But, what is the reaction, is it creative or recreative?

प्रश्न : हमें प्रबोधित करने वाली ये चर्चाएं आपके उद्देश्य को कहां तक सफल और संतुष्ट करती हैं?


प्रश्न : हमें प्रबोधित करने वाली ये चर्चाएं आपके उद्देश्य को कहां तक सफल और संतुष्ट करती हैं? संसार बहुत लंबे समय से इस क्रान्तिकारी संदेश को, अहम् के विनाश के माध्यम से परम सत्य को पाने, और उसके द्वारा सबसे उच्च और सबसे श्रेष्ट तत्व को प्राप्त करने के वचनों को सुनता आ रहा है| परंतु उसकी प्रतिक्रिया के रूप में क्या रहा है – यह सृजनात्मक है या मनोरंजन मात्र ?

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मुझे प्रतीत होता है


मुझे प्रतीत होता है कि मनुष्य शताब्दियों से शान्ति, मुक्ति तथा परमानन्द की उस स्तिथि को खोजता रहा है, जिसे वह ईश्वर कहता है | इसे उसने भिन्न- भिन्न नामों से और इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में ढूँढा है; तथा स्पष्टतया कुछ ने ही उस महन शांति व मुक्ति के आँतरिक भाव को, उस अवस्था को पाया है, जिसे मनुष्य ईश्वर कहता रहा है |

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यह सीधी सी बात है |


जब मैं अपने आप को एक हिंदू, एक ईसाई, एक बौद्ध कहता हूँ – जो कि पूरी की पूरी परंपरा है, परंपरा का बोझ, ज्ञान का बोझ, सरकारों का बोझ है – तो मैं कुछ देख नहीं सकता हूँ, मैं स्पष्ट और सही तरीके से अवलोकन नहीं कर सकता हूँ | इस प्रकार के मन से मैं जीवन को मात्र एक ईसाई, एक बौद्ध, एक हिंदू, एक राष्ट्रवादी, एक साम्यवादी, अथवा किसी अन्य वाद के अनुगामी की दृष्टि से ही देख पाता हूँ, तथा उस तरह की दृष्टि मुझे अवलोकन करने से रोकती है | यह सीधी सी बात है |

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