J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)
Vision of a School
In Krishnamurti's words a school that reflected his teachings would have the following qualities.
"First of all there has to be an atmosphere of immensity. The feeling that I am entering a temple. There must be beauty, space, quietness, dignity. There must be a sense of togetherness in the student and the teacher, a state of floration, a sense of flowering, a feeling of extraordinary sacredness. There must be truthfulness, fearlessness. The child must put his hands to the earth; there must be in him a quality of otherness". When asked how this is to be done concretely, Krishnamurti responded. "I would enquire how to teach the child to learn without memory being predominant. I would talk about attention and not concentration. I would go into the way the child sleeps, his food, the games he plays, the furniture in his room; I would see that the child is attentive to the trees, the birds, the spaces which are around him. I would see that he grows in an atmosphere of attention."
Thought Seeks Security
Thought is the very essence of security, and that is what the most bourgeois mind wants—security, security at every level! To bring about a total change of the human consciousness, thought must function at one level and must not function at another level.
विचार सुरक्षा चाहता है
विचार तो सुरक्षा का अपरिहार्य लक्षण है और पुरातनवादी मानसिकता वाले लोग यही चाहता है -- सुरक्षा और वह भी हरएक स्तर पर | मानव चेतना में संपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए विचार एक स्तर पर अपना कार्यकलाप करे परंतु अन्य स्तर पर नहीं |
Question: How can we remove our defects forever?
Krishnamurti: You see how the mind wants to be secure. It does not want to be disturbed. It wants forever and forever to be completely safe, and a mind that wants to be completely safe, to get over all difficulties forever and forever, is going to find a way.
प्रश्न : हम अपने दोषों को हमेशा के लिए कैसे दूर कर सकते हैं?
कृष्णमूर्ति : आप यह देख सकते हैं कि मन किस प्रकार से सुरक्षित रहना चाहता है | यह किसी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहता | यह सदा-सदा के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित बना रहना चाहता है, और ऐसा मन जो पूरी तरह से सुरक्षित बना रहना चाहता है जो हमेशा के लिए अपनी कठिनाइयों को मिटा देना चाहता है, अवश्य ही इसके लिए कोई उपाय खोज लेगा |
सर, आप वैज्ञानिक हैं
कृष्णमूर्ति : सर, आप वैज्ञानिक हैं, आपने परमाणु इत्यादि का निरीक्षण किया है | इस सारे निरीक्षण के उपरांत क्या आप यह महसूस नहीं करते कि इस सबके परे बहुत कुछ और भी है?
डेविड बोम : हमेशा यह महसूस होता है कि इसके पार कुछ और है, पर इससे यह पता नहीं चलता कि यह क्या है? यह तो सपष्ट है ही कि जो कुछ भी मनुष्य जानता है, सीमित है।
कृष्णमूर्ति : हां।
Power
I think we ought to talk about something of which some of us may be aware, namely, the peculiar desire for power over others and over oneself, which most of us have.
ताकत
मेरा विचार है की हम किसी ऐसे विषय पर बात करें जिसके बारे में हममें से कुछ लोगों को पता हो – जैसे, दूसरों पर और खुद पर भी प्रभुत्व जमाने की उस खास इच्छा के बारे में जो कि हममें से ज़्यादातर लोगों में होती है |
शाश्वत का अन्वेषण
क्या मन अपनी समस्त अंतर्वस्तुओं को, अपने निषेधों, प्रतिरोधों को, अपनी अनुशासनात्मक गतिविधिओं को, सुरक्षा के लिए किये जा रहे अपने विविध प्रयत्नों को, जो इसकी सोच को संस्कारित और सीमित बना देते हैं – इन सब को समझकर मन एक एकीकृत प्रक्रिया के रूप में शाश्वत का अन्वेषण करने के लिए मुक्त हो सकता है? क्योंकि उस अन्वेषण के बिना, उस यथार्थ अनुभव के अभाव में हमारी सारी समस्याएं और उनके हल हमें और अधिक तबाही की ओर ले जायेंगे |
आज संसार में ईश्वर की बहुत सी अवधारणाएं हैं |
प्रश्न: आज संसार में ईश्वर की बहुत सी अवधारणाएं हैं | आपका ईश्वर के संबंध में क्या विचार है?
कृष्णमूर्ति: सबसे पहले हमें यह पता लगाना चाहिए की अवधारणा से हमारा मतलब क्या है | सोचने की प्रक्रिया से हमारा क्या अभिप्राय है? क्योंकि अंततः हम जब किसी अवधारणा को प्रतिपादित करते है, जैसे ईश्वर को ही लें, तो हमारा यह प्रतिपादन, यह अवधारणा हमारे संस्कारों का ही परिणाम होती है |
प्रश्न: ईश्वर क्या है?
प्रश्न: ईश्वर क्या है?
कृष्णमूर्ति: आप कैसे पता लगाएंगे? क्या आप किसी और की जानकारी को स्वीकार कर लेंगे? या आप खुद यह खोज करने की कोशिश करेंगे कि ईश्वर क्या है? प्रश्न पूछना बहुत सरल है, पर सत्य को अनुभूत करना प्रचुर प्रज्ञा, गहन संवाद तथा खोज की अपेक्षा रखता है |
The Crisis Is In You
We are facing a tremendous crisis which the politicians can never solve. Nor can the scientists understand or solve the crisis, nor yet the business world, the world of money. The turning point is not in politics, in religion, in the scientific world; it is in our consciousness.
संकट आपके भीतर ही है |
हम एक भयानक संकट का सामना कर रहे हैं | इस संकट का निवारण करना राजनेताओं के बस की बात नहीं, क्योंकि वे सारे किसी विशिष्ट ढंग से चिंतन करने के लिए पूर्व नियोजित हैं; वैज्ञानिक लोग भी इस संकट का सामना नहीं कर पाएंगे; और न ही व्यापर जगत, न ही धन-दौलत इस मामले में कुछ कर पायेंगे | यह मोड़, यह बदलाव न तो राजनीति के बस की बात है, न ही धर्म के, और न ही विज्ञानं जगत के; यह मसला हमारी चेतना से जुड़ा हुआ है |
वह जीवन नहीं जो हम जी रहे हैं
संभवत: इस बात का पता लगाने की कोशिश में कुछ समय देना श्रेयस्कर होगा की क्या जीवन की कोई सार्थकता है भी | वह जीवन नहीं जो हम जी रहे हैं, क्योंकि आधुनिक अस्तित्व की सार्थकता तो न के बराबर है |
मुझे प्रतीत होता है
मुझे प्रतीत होता है कि मनुष्य शताब्दियों से शान्ति, मुक्ति तथा परमानन्द की उस स्तिथि को खोजता रहा है, जिसे वह ईश्वर कहता है | इसे उसने भिन्न- भिन्न नामों से और इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में ढूँढा है; तथा स्पष्टतया कुछ ने ही उस महन शांति व मुक्ति के आँतरिक भाव को, उस अवस्था को पाया है, जिसे मनुष्य ईश्वर कहता रहा है |

