J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







Krishnamurti Retreat Centre , Uttarkashi


Krishnamurti Retreat Centre (KRC) is located on the banks of the river Bhagirathi in Uttarkashi, which is on the ancient pilgrim route from Rishikesh to Gomukh, the origin of the river Ganga. Sitting atop the high bank of the river, on about 1.4 acres of land, the retreat has as its backdrop the steep mountain slopes covered with pine forests. Set in the quiet rural environs of Ranari village, the retreat is surrounded by mountains and green fields on all sides.

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Question: Why do we feel shy?


Krishnamurti: It is good to be a little shy, is it not? A boy or a girl who is just pushing everyone without reservation, without a sense of hesitation, is not as tender and sensitive as a shy person.

प्रश्न : हम शरमाते क्यों हैं?


कृष्णमूर्ति : थोड़ा-बहुत शर्माना तो अच्छी बात है, है न? जो बालक-बालिकाएं बिलकुल संकोच नहीं करते, जिन्हें ज़रा सी भी हिचक महसूस नहीं होती--वे किसी शर्मीले व्यक्ति कि तरह मृदुल और संवेदनशील नहीं हुआ करते |

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व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है


व्यक्ति का सर्वोच्च महत्व है, भले ही समाज, धर्म और सरकार इस तथ्य को मान्यता नहीं देते | आप अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आप यथार्थ की विस्फोटक सर्जनात्मकता को लाने वाले एकमात्र साधन हैं | आप स्वयं ही वह वातावरण हैं जिसमें यथार्थ अस्तित्व में आ सकता है | लेकिन आप देख चुके हैं कि सभी सरकारें, सभी संगठित धर्म और समाज व्यक्ति के महत्व पर ज़ोर देते हुए भी व्यक्ति के मर्म, व्यक्ति की भावनाओं को मिटाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे सामूहिक भावदशा, सामूहिक प्रतिक्रिया चाहते हैं |

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What you are, the world is.


What you are, the world is. So your problem is the world's problem. Surely, this is a simple and basic fact, is it not? In our relationship with the one or the many we seem somehow to overlook this point all the time.

जैसे आप होते है वैसा ही संसार हो जाता है


जैसे आप होते है वैसा ही संसार हो जाता है | इसीलिए आपकी समस्या संसार की समस्या बन जाती है | निश्चित रूप से यह एक सरल और मौलिक तथ्य है, है न? परंतु किसी एक के साथ या अन्य अनेकों के साथ अपने संबंधों में हम हमेशा किसी न किसी तरह इस मर्म को उपेक्षित करते है |

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