J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







हिंसा के माहौल में हमारी ज़िम्मेदारी

कृष्णमूर्ति अध्ययन शिविर : 1 - 4 दिसम्बर 2016 कृष्णमूर्ति स्टडी सेंटर, वाराणसी
‘‘क्या आप हिंसा के चेहरे को साफ और स्पष्ट रूप से देख सकते हैं - हिंसा का चेहरा जो न केवल आपके बाहर बल्कि भीतर भी है ? जिसका अर्थ होगा कि आप पूरी तरह से हिंसा से मुक्त हैं क्योंकि आपने किसी विचारधारा को नहीं थाम रखा है, जिसके जरिये आपको हिंसा से छुटकारा मिलने जा रहा है। इसके लिए बहुत गहरे ध्यान की आवश्यकता है, न कि आपकी शाब्दिक सहमति या असहमति मात्र की।’’ - जे. कृष्णमूर्ति, ज्ञात से मुक्ति


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The Crisis Is In You


We are facing a tremendous crisis which the politicians can never solve. Nor can the scientists understand or solve the crisis, nor yet the business world, the world of money. The turning point is not in politics, in religion, in the scientific world; it is in our consciousness.


संकट आपके भीतर ही है |


हम एक भयानक संकट का सामना कर रहे हैं | इस संकट का निवारण करना राजनेताओं के बस की बात नहीं, क्योंकि वे सारे किसी विशिष्ट ढंग से चिंतन करने के लिए पूर्व नियोजित हैं; वैज्ञानिक लोग भी इस संकट का सामना नहीं कर पाएंगे; और न ही व्यापर जगत, न ही धन-दौलत इस मामले में कुछ कर पायेंगे | यह मोड़, यह बदलाव न तो राजनीति के बस की बात है, न ही धर्म के, और न ही विज्ञानं जगत के; यह मसला हमारी चेतना से जुड़ा हुआ है |

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प्रश्न: ईश्वर क्या है?


प्रश्न: ईश्वर क्या है?
कृष्णमूर्ति: आप कैसे पता लगाएंगे? क्या आप किसी और की जानकारी को स्वीकार कर लेंगे? या आप खुद यह खोज करने की कोशिश करेंगे कि ईश्वर क्या है? प्रश्न पूछना बहुत सरल है, पर सत्य को अनुभूत करना प्रचुर प्रज्ञा, गहन संवाद तथा खोज की अपेक्षा रखता है |

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Where There Is Dependency, Attachment, There Is No Love


Psychologically, then, our relationships are based on dependence, and that is why there is fear. The problem is not how not to depend, but just to see the fact that we do depend.

जहाँ निर्भरता व आसक्ति हों, वहां प्रेम नहीं रह सकता


मनोवैज्ञानिक तौर पर हमारे संबंध निर्भरता पर आधारित रहते हैं और इसीलिए इनमें भय का वास रहता है | समस्या यह नहीं है कि निर्भर कैसे न रहें, हमें बस इस तथ्य को देखना है कि हम निर्भर हैं |

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