J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)



Habit


For several days we have been talking about fear and the various causes that bring about fear. I think one of the most difficult things, which most of us do not seem to apprehend, is the problem of habit. You know, most of us think that when we are young, we should cultivate good habits as opposed to bad habits, and we are told all the time what bad habits are and what good habits are; we are always told of habits that are worthwhile cultivating, and the habits which we should resist or put away.

आदत


पिछले कुछ दिनों से हम भय और उन विभिन्न कारणों पर बातचीत करते आ रहे हैं जो भय को जन्म देते हैं | ...... हममें से अधिकतर लोग यही मानते हैं कि अपनी छोटी उम्र में ही हमें बुरी आदतों के स्थान पर अच्छी आदतों को अपना लेना चाहिए और हमें लगातार यह बताया जाता है कि बुरी आदतें क्या है और अच्छी आदतें क्या हैं |

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Mediocrity


One of the greatest difficulties that we have is to find out what makes for mediocrity. You know what that word means? A mediocre mind really means a mind that is impaired, that is not free, that is caught in fear, in a problem; it is a mind that merely revolves round its own self-interest, round its own success and failure, its own immediate solutions of the sorrows that inevitably come to a petty mind.

आधा–अधूरापन


हमारी एक बहुत बड़ी कठिनाई यह पता लगा सकने की है कि आधा–अधूरापन किन कारणों से बना रहता है | क्या आप जानते हैं कि इस शब्द का क्या अर्थ है? आधा–अधूरा मन वस्तुतः वह मन है जो कि सामर्थ्यहीन है, जो मुक्त नहीं है, जो भयग्रस्त है, जो किसी न किसी समस्या में उलझा हुआ है – यह एक ऐसा मन है जो बस स्वार्थ को ही केंद्र बनाकर उसके चारों ओर, अपनी ही सफलता और असफलता के इर्द-गिर्द, अपने ही दुखों के तात्कालिक समाधानों कि तलाश में रहता है, और एक क्षुद्र मन इन दुखों से अनिवार्यतः घिरा ही रहता है |

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Understanding Our Mind


It seems to me that without understanding the way our minds work, one cannot understand and resolve the very complex problems of living. This understanding cannot come through book knowledge.

अपने मन को समझना


मुझे ऐसा लगता है कि अपने मन के तौर-तरीकों को समझे बिना यह संभव नहीं है कि जीवन की अति जटिल समस्याओं को समझा और सुलझाया जा सके | इस प्रकार की समझ किताबी ज्ञान से नहीं आ सकती |

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मैं ईश्वर का अनुभव कैसे कर सकता हूँ?


प्रश्न: मैं ईश्वर का अनुभव कैसे कर सकता हूँ? इस अनुभव के बिना जीवन का क्या उद्देश्य है?
कृष्णमूर्ति: क्या मैं जीवन को सीधे-सीधे समझ सकता हूँ, अथवा मुझे अपने जीवन को अर्थ प्रदान करने के लिए किसी तत्व का अनुभव करना होगा? क्या आप समझ रहे हैं? क्या सौंदर्य की कदरदानी के लिए मुझे उसका उद्देश्य समझना होगा? क्या प्रेम का एक कारण होना चाहिए?

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