J. Krishnamurti's Teachings Online in Indian Languages (Hindi, Punjabi, Gujarati, Marathi, Bengali etc.)







हिंसा के माहौल में हमारी ज़िम्मेदारी

कृष्णमूर्ति अध्ययन शिविर : 1 - 4 दिसम्बर 2016 कृष्णमूर्ति स्टडी सेंटर, वाराणसी
‘‘क्या आप हिंसा के चेहरे को साफ और स्पष्ट रूप से देख सकते हैं - हिंसा का चेहरा जो न केवल आपके बाहर बल्कि भीतर भी है ? जिसका अर्थ होगा कि आप पूरी तरह से हिंसा से मुक्त हैं क्योंकि आपने किसी विचारधारा को नहीं थाम रखा है, जिसके जरिये आपको हिंसा से छुटकारा मिलने जा रहा है। इसके लिए बहुत गहरे ध्यान की आवश्यकता है, न कि आपकी शाब्दिक सहमति या असहमति मात्र की।’’ - जे. कृष्णमूर्ति, ज्ञात से मुक्ति


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Comparison and Competition, or Cooperation?


One of the things that prevents the sense of being secure is comparison. When you are compared with somebody else in your studies or in your games or in your looks, you have a sense of anxiety, a sense of fear, a sense of uncertainty. So, as we were discussing yesterday with some of the teachers, it is very important to eliminate in our school this sense of comparison, this giving grades or marks,and ultimately the fear of examinations...

तुलना, स्पर्धा या सहयोग?


एक बात जो सुरक्षित होने के भाव में आड़े आती है वह है तुलना| जब आपकी तुलना किसी दूसरे से की जाती है -- आपकी पढ़ाई के बारे में, आपके खेलकूद के बारे में अथवा आपके रूप या चेहरे के बारे में -- तब आप व्यग्रता, घबराहट और अनिश्चितता के भाव से भर जाते हैं | इसलिए जैसा की कल हम कुछ अध्यापकों के साथ चर्चा कर रहे थे, यह नितांत आवश्यक है की हमारे विद्यालय में तुलना का यह एहसास, यह अंक या श्रेणी देना और सबसे बड़ा तो परीक्षा का भूत समाप्त किया जाए |

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Why Are We Bored?


If you are bored, why are you bored? What is the thing called boredom? Why is it that you are not interested in anything? There must be reasons and causes which have made you dull: suffering, escapes, beliefs, incessant activity, have made the mind dull, the heart unpliable.

हम क्यों ऊबते है?


यदि आप ऊब रहे है तो क्यों ऊब रहे है? वह क्या है जिसे हम ऊब कहते है? ऐसा क्यों है की आप किसी बात में रूचि नहीं रखते? ऐसा होने का कोई कारण, कोई आधार तो होगा जिसने आपको मंद-कुंद बना दिया है | दुःख, पलायन, विश्वास, अनवरत क्रियाकलाप ने आपके मन को कठोर कर दिया है |

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Prejudice has something in common


Prejudice has something in common with ideals, beliefs and faiths. We must be able to think together; but our prejudices, our ideals and so on, limit the capacity and the energy required to think, to observe and examine together so as to discover for ourselves what lies behind
all the confusion, misery, terror, destruction and tremendous violence in the world.

पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है |


पूर्वाग्रहों में और आदर्शों, विश्वासों, आस्थाओं में कुछ समानता हुआ करती है | पूर्वाग्रह, आदर्श और ऐसी तमाम बातें, मिलजुल कर सोचने, देखने-परखने की हमारी क्षमता तथा ऊर्जा को प्रतिबंधित कर देती हैं, सीमित कर देती हैं, और इस कारण हम यह पता नहीं कर पाते हैं की इस संसार मैं फैले विभ्रम, पीड़ा, आतंक, विनाश तथा भयानक हिंसा आदि के पीछे असल मुद्दा क्या है |

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